चूड़ाकर्म (मुंडन) संस्कार – हिंदू धर्म का आठवां संस्कार... Description Of the Naam Karan

माना जाता है कि शिशु जब माता के गर्भ से बाहर आता है तो उस समय उसके केश अशुद्ध होते हैं। शिशु के केशों की अशुद्धि दूर करने की क्रिया ही चूड़ाकर्म संस्कार कही जाती है। दरअसल हमारा सिर में ही मस्तिष्क भी होता है इसलिये इस संस्कार को मस्तिष्क की पूजा करने का संस्कार भी माना जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार मानव जीवन 84 लाख योनियों के बाद मिलता है। पिछले सभी जन्मों के ऋण को उतारने और पाप कर्मों से मुक्ति के उद्देश्य से, उसके जन्मकालीन केश काटे जाते हैं और ऐसा ना करने पर दोष लगता है। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी माने जाते हैं और इनके साथ-साथ शास्त्रीय व पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक शिशु के मस्तिष्क को दुरुस्त करने, बुद्धि को बढ़ाने और गर्भावस्था की अशुद्धियों को दूर कर मानवतावादी आदर्शों को प्रतिस्थापित करने के लिए मुंडन संस्कार करवाया जाता हैं, जातक का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहे व वह अपने दिमाग को सकारात्मकता के साथ सार्थक रुप से उसका सदुपयोग कर सके यही चूड़ाकर्म संस्कार का उद्देश्य भी है। इस संस्कार से शिशु के तेज में भी वृद्धि होती है।

कब करें मुंडन संस्कार

मनुस्मृति के अनुसार द्विजातियों को प्रथम अथवा तृतीय वर्ष में यह संस्कार करना चाहिये। अन्नप्राशन संस्कार के कुछ समय पश्चात प्रथम वर्ष के अंत में इस संस्कार को किया जा सकता है। लेकिन तीसरे वर्ष यह संस्कार किया जाये तो बेहतर रहता है। इसका कारण यह है कि शिशु का कपाल शुरु में कोमल रहता है जो कि दो-तीन साल की अवस्था के पश्चात कठोर होने लगता है। ऐसे में सिर के कुछ रोमछिद्र तो गर्भावस्था से ही बंद हुए होते हैं। चूड़ाकर्म यानि मुंडन संस्कार द्वारा शिशु के सिर की गंदगी, कीटाणु आदि दूर हो जाते हैं। इससे रोमछिद्र खुल जाते हैं और नये व घने मजबूत बाल आने लगते हैं। यह मस्तिष्क की रक्षा के लिये भी आवश्यक होता है। कुछ परिवारों में अपनी कुल परंपरा के अनुसार शिशु के जन्म के पांचवे या सातवें साल भी इस संस्कार को किया जाता है।

चूड़ाकर्म संस्कार की विधि...

चूड़ाकर्म संस्कार किसी शुभ मुहूर्त को देखकर किया जाना चाहिये। इस संस्कार को को किसी पवित्र धार्मिक तीर्थ स्थल पर किया जाता है। इसके पिछे मान्यता है कि जातक पर धार्मिक स्थल के दिव्य वातावरण का लाभ मिले। एक वर्ष की आयु में जातक के स्वास्थ्य पर इसका दुष्प्रभाव पड़ने के आसार होते हैं इस कारण इसे पहले साल के अंत में या तीसरे साल के अंत से पहले करना चाहिये। मान्यता है कि शिशु के मुंडन के साथ ही उसके बालों के साथ कुसंस्कारों का शमन भी हो जाता है व जातक में सुसंस्कारों का संचरण होने लगता है। शास्त्रों में लिखा भी मिलता है कि “तेन ते आयुषे वपामि सुश्लोकाय स्वस्त्ये”। इसका तात्पर्य है कि मुंडन संस्कार से जातक दीर्घायु होता है। यजुर्वेद तो यहां तक कहता है कि दीर्घायु के लिये, अन्न ग्रहण करने में सक्षम करने, उत्पादकता के लिये, ऐश्वर्य के लिये, सुंदर संतान, शक्ति व पराक्रम के लिये चूड़ाकर्म अर्थात मुंडन संस्कार करना चाहिये।

इसी प्रकार हिंदू धर्म में कुछ परंपराएं हैं जिन्हें सब हिंदू बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूरी करते हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक मुंडन है। मुंडन संस्कार को हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण 16 संस्कारों में से एक माना जाता है। लोग अपनी रीति के अनुसार जन्म और मृत्यु के समय इस संस्कार को करते हैं। मुंडन (mundan) करवाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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हर धर्म में मुंडन कराने का अलग-अलग तरीका हो सकता है, कुछ लोग घर में पहले नाई से बच्चे के बाल उतरवाते हैं, फिर पंडित से बच्चे को आशीर्वाद दिलाते हैं। वहीं, आजकल कुछ लोग पार्लर में ले जाकर भी बच्चे का मुंडन करा देते हैं, कुछ लोग घर में ही पंडित को बुलाकर बच्चे का मुंडन करवाते हैं जोकि गलत है, मुंडन कराने के लिए धार्मिक स्थलों पर जैसे मंदिर या गंगा के किनारे ले जाकर बच्चे का मुंडन कराना चाहिए, मुंडन संस्कार किसी देवस्थल या तीर्थ स्थल पर इसलिए कराया जाता है कि उस स्थल के दिव्य वातावरण का लाभ शिशु को मिले तथा उसके मन में सुविचारों की उत्पत्ति हो, जिस शिशु का मुंडन संस्कार सही समय एवं शुभ मुहूर्त में नहीं किया जाता है उसमें बौद्धिक विकास एवं तेज शक्ति का अभाव पाया जाता है। इसलिए शिशु का मुंडन शास्त्रीय विधि से अवश्य किया जाना चाहिए, इस वेबसाइड द्वारा वैदिक कर्मकाण्ड हेतु सुगमता से समग्र भारत में लोगो को योग्य पुरोहितों की व्यवस्था मिले यही हमारा मुख्य उद्देश्य है, तो यदि आपको किसी भी प्रकार की पूजा के लिए किसी भी अनुभवी पंडित की जरुरत है तो आप हमसे अपनी लोकेशन के अनुसार दिए गए हेल्पलाइन नंबर्स के माध्यम से संपर्क कर सकते है, क्यूंकि आवश्यकता अनुसार चयनित जगह पर पंडित जी उपलब्ध करना हमारी पहली प्राथमिकता होती है...!!


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