महामृत्युंजय मंत्र की विधिवत पूजन विधि... Description Of the Puja

समस्‍त संसार के पालनहार, तीन नेत्र वाले शिव की हम अराधना करते हैं। विश्‍व में सुरभि फैलाने वाले भगवान शिव अकाल मृत्‍यु के भय सेे हमें मुक्ति दिलाएं, हम भगवान शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं,उनसे हमारी प्रार्थना है कि वे हमें मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर दें, जिससे मोक्ष की प्राप्ति हो जाए.जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बन्धनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं, तथा आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं !

उद्देश्य ..

महामृत्युंजय मंत्र के जप करने से असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति को रोग से छुटकारा मिलता है |यदि कोई ऐसा बीमार व्यक्ति जो असहनीय पीड़ा झेल रहा हो और जीवन और मृत्यु के बीच में दिखाई देने लगे | ऐसे में उस व्यक्ति के नाम से किसी विद्वान पंडित द्वारा महा मृत्युंजय मंत्र के सवा लाख जाप करवाने से सम्भावना है कि उसकी पीड़ा शांत हो जाये नहीं तो पीड़ित व्यक्ति अपनी पीड़ा से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है, इस मंत्र के नियमित जाप और श्रवण मात्र से मनुष्य को सभी प्रकार से भय , रोग, दोष और पाप आदि से मुक्ति मिलती है | ऐसा व्यक्ति सभी सांसारिक सुखों को प्राप्त करता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है |

संक्षेप में पूजा विधि निम्नलिखित है- ...

मृत्युंजय मंत्र और महा मृत्युंजय मंत्र दोनों ही मन्त्रों के जप शिवालय में शिवलिंग में समक्ष बैठकर करने चाहिए | सोमवार के दिन से इस मंत्र के जप शुरू किये जाने चाहिए | इसके अतिरिक्त सावन मास में किसी भी दिन या शिवरात्रि के दिन भी मंत्र जप शुरू करने के लिए अति शुभ होते है | शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र के सवा लाख जप करने से भयंकर से भयंकर बीमारी या पीड़ा से छुटकारा मिलता है | किन्तु आप अपने सामर्थ्य अनुसार पहले दिन ही जप की संख्या का संकल्प लेकर शुरू करें | इसमें आप 11000 , 21000 या आप अपने सामर्थ्य के अनुसार जप संख्या सुनिश्चित करें, शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध , जल और फल ,फूल आदि सर्मपित कर शिवलिंग के समक्ष बैठ जाये और धुप और दीपक जलाकर मंत्र जप शुरू करें | यदि आप रूद्रअभिषेक द्वारा शिवलिंग पूजन करते है तो यह अति उत्तम और शीघ्र फल प्रदान करता है, पहले दिन आप जितनी माला का जाप करते है प्रतिदिन उतनी ही माला का जाप करें | इसमें आप माला के जाप की संख्या बढ़ा सकते है किन्तु कम कदापि न करें, सुबह के 12 बजे से पहले इस मंत्र के जप करने चाहिए, इसलिए सुबह का एक समय निश्चित करें और 21 दिन या फिर 41 दिन में मंत्र जप को पूरा करें, महामृत्युंजय मंत्र के जप व्यक्ति द्वारा स्वयं भी किये जा सकते है या फिर समय कम होने की दशा में सम्पूर्ण विधि द्वारा जप करने के लिए आप हमसे संपर्क करें..!!

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

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महा मृत्युंजय मंत्र का पुरश्चरण सवा लाख है इस मंत्र का जप रुद्राक्ष की माला पर सोमवार से शुरू किया जाता है.जप सुबह १२ बजे से पहले होना चाहिए,क्योंकि ऐसी मान्यता है की दोपहर १२ बजे के बाद इस मंत्र के जप का फल नहीं प्राप्त होता है.आप अपने घर पर महामृत्युंजय यन्त्र या किसी भी शिवलिंग का पूजन कर जप शुरू करें या फिर सुबह के समय किसी शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग का पूजन करें और फिर घर आकर घी का दीपक जलाकर मंत्र का ११ माला जप कम से कम ९० दिन तक रोज करें या एक लाख पूरा होने तक जप करते रहें. अंत में हवन हो सके तो श्रेष्ठ अन्यथा २५ हजार जप और करें.ग्रहबाधा, ग्रहपीड़ा, रोग, जमीन-जायदाद का विवाद, हानि की सम्भावना या धन-हानि हो रही हो, वर-वधू के मेलापक दोष, घर में कलह, सजा का भय या सजा होने पर, कोई धार्मिक अपराध होने पर और अपने समस्त पापों के नाश के लिए महामृत्युंजय या लघु मृत्युंजय मंत्र का जाप किया या कराया जा सकता है..!!


Auspicious Day Puja Time Venue
Monday Morning Time (Before 12 PM) Shiv Temple

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